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Brahman’s nature

अक्षरं ब्रह्म परमं स्वभावोऽध्यात्ममुच्यते। भूतभावोद्भवकरो विसर्गः कर्मसंज्ञित ॥

यह श्लोक संस्कृत भाषा में है और इसका अर्थ है कि वर्ण (अक्षर) ब्रह्म (ईश्वर) का परम स्वभाव है जो आध्यात्मिक चेतना से सम्बन्धित है। भूत, भाव और उनसे उत्पन्न होने वाले क्रियाएं जो कर्म कहलाती हैं, उनका विसर्ग (विभाजन) होता है जो संसार में संचार करता है। इस श्लोक का विस्तृत विवरण वेदान्त दर्शन में मिलता है।


Response

  1. Anil avatar
    Anil

    Nice

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